Giloy ghan vati (गिलोय घन वटी)

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Description

गिलोय के औषधीय गुण :
आयुर्वेद के अनुसार गिलोय की पत्तियां, जड़ें और तना तीनो ही भाग सेहत के लिए बहुत गुणकारी हैं लेकिन बीमारियों के इलाज में सबसे ज्यादा उपयोग गिलोय के तने या डंठल का ही होता है। गिलोय में बहुत अधिक मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं साथ ही इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और कैंसर रोधी गुण होते हैं। इन्हीं गुणों की वजह से यह बुखार, पीलिया, गठिया, डायबिटीज, कब्ज़, एसिडिटी, अपच, मूत्र संबंधी रोगों आदि से आराम दिलाती है। बहुत कम औषधियां ऐसी होती हैं जो वात, पित्त और कफ तीनो को नियंत्रित करती हैं, गिलोय उनमें से एक है। गिलोय का मुख्य प्रभाव टॉक्सिन (विषैले हानिकारक पदार्थ) पर पड़ता है और यह हानिकारक टॉक्सिन से जुड़े रोगों को ठीक करने में असरदार भूमिका निभाती है।

Giloy Ghan Vati is beneficial in all types of fevers. It increases immunity, which helps to prevent infections and several other diseases. In Charaka Samhita, Giloy is considered as Medhya Rasayana. It means that it increases intelligence, improves memory and enhances cognitive functions. Due to its rejuvenating properties, it helps to get a longer life expectancy. Its main indications include all types of fevers (especially chronic fever), low immunity, excessive thirst, post fever debility, hyperuricemia (i.e. high uric acid) and rheumatoid arthritis. Furthermore, it is also used in the treatment of jaundice, anemia, skin diseases, piles, dyspnea, diabetes, dysuria and heart diseases.

Details

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  • SKU: CEC2-388E4

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